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 भारत में उद्योग :  भारत के प्रमुख उद्योग


■ देश के आर्थिक विकास के लिये औद्योगिक विकास आवश्यक है। उद्योगों की स्थिति कई कारणों, जैसे- कच्चे माल की उपलब्धता, शक्ति, बाज़ार, पूंजी, यातायात और श्रम इत्यादि द्वारा प्रभावित होती है।

■ इन कारकों का सापेक्षिक महत्त्व समय और स्थान के साथ बदल जाता है।

■ कच्चे माल व उद्योगों के प्रकार में घनिष्ठ संबंध होता है। आर्थिक दृष्टि से उद्योगों को उस स्थान पर स्थापित करना चाहिये जहाँ उत्पादन मूल्य और निर्मित वस्तुओं को उपभोक्ताओं तक वितरण करने का मूल्य न्यूनतम हो।


   उद्योगों को प्रभावित करने वाले कारक।

1 कच्चा माल
2 श्रम
3  शक्ति
4  बाजार
5  अधौगिक नीति
6 परिवहन

लौह-इस्पात उद्योग

■ कच्चे माल की उपलब्धता वाले क्षेत्रों में भारत के लौह-इस्पात उद्योगों का विकास किया गया है।

■ भारत में इस उद्योग का स्थानीयकरण न्यूनतम परिवहन लागत के सिद्धांत का पालन करता है।

 ■ कोयला क्षेत्रों में स्थित लौह-इस्पात प्रमुख केंद्र- बर्नपुर-कुल्टी, दुर्गापुर, बोकारो।

 ■ लौह-अयस्क क्षेत्रों में स्थित इस्पात प्रमुख केंद्र - राउरकेला, भद्रावती, सलेम, विजयनगर।

■ कोयला व लौह के मध्य क्षेत्र में स्थित केंद्र- जमशेदपुर।

■ तटीय क्षेत्र में स्थित लौह-इस्पात प्रमुख केंद्र- विशाखापत्तनम |

एल्युमिनियम उद्योग

                    इस उद्योग के स्थानीयकरण में बॉक्साइट व विद्युत की उपलब्धता होना अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, अतः इस उद्योग की स्थापना वैसे स्थानों पर हुई है जहाँ सस्ती जलविद्युत व कच्चा माल उपलब्ध हो।

■ भारत में एल्युमिनियम का पहला कारखाना जे. के. नगर (प. बंगाल) में लगाया गया।

■ हिंदुस्तान एल्युमिनियम कंपनी (HINDALCO): इसकी स्थापना यू. एस. ए. के सहयोग से उत्तर प्रदेश के रेणुकूट में हुई । रेणुकूट कारखाने को बॉक्साइट की आपूर्ति झारखंड और अमरकंटक (मध्य प्रदेश) से तथा सस्ती विद्युत 'रिहंद जलविद्युत परियोजना' से प्राप्त होती है।

■ इंडियन एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (INDALCO): इसकी स्थापना कनाडा के सहयोग से हुई। इसके कारखाने मुरी (झारखंड), अल्वाये (केरल), जे.के. नगर (प. बंगाल) तथा हीराकुड (ओडिशा) में हैं।

■ भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (BALCO): इसकी स्थापना सोवियत संघ के सहयोग से हुई। इसके कारखाने कोरवा (छत्तीसगढ़) तथा कोयना (महाराष्ट्र) में हैं।

■ नेशनल एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (NALCO): इसकी स्थापना फ्राँस के सहयोग से हुई। इसके कारखाने दामनजोडी (ओडिशा) तथा अनुगुल (ओडिशा) में हैं।

■ मद्रास एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (MALCO) : इसकी स्थापना इटली के सहयोग से हुई। इसके कारखाने मैटूर (तमिलनाडु) तथा सलेम (तमिलनाडु) में हैं। ■ वेदांता एल्युमिनियम लिमिटेड का कारखाना झारसुगुडा (ओडिशा) में है।

सीमेंट उद्योग

■ सीमेंट मूल रूप से संघटकों का मिश्रण है, यह मुख्यतः सिलिकेट और कैल्शियम का एलुमिनेट होता है जिसे कैल्शियम ऑक्साइड, सिलिका, एल्युमिनियम ऑक्साइड और आयरन ऑक्साइड से तैयार किया जाता है।

 ■ सीमेंट उद्योग वज़नहासी तथा मूलतः कच्चे माल पर आधारित उद्योग है।

■ भारत चीन के पश्चात् दूसरा सबसे सीमेंट उत्पादक देश है। बड़ा

■ भारत में सीमेंट उद्योग राजस्थान से विंध्यन पर्वत तथा छोटानागपुर पठार तक विस्तृत है।

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सूती वस्त्र उद्योग

■ यह भारत का परंपरागत उद्योग है। ■ भारत में आधुनिक ढंग से सूती वस्त्र उद्योग के प्रथम कारखाने की स्थापना सन् 1818 में फोर्टग्लास्टर (कोलकाता) में हुई।

■ भारत में सूती वस्त्र उद्योग के विकास के निम्न कारण हैं-

      a ) भारत में कपास का उत्पादन बड़ी मात्रा में होता है।
       b) देश में इस उद्योग के लिये आवश्यक कुशल श्रमिक प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं।

■ वस्त्र उद्योग शुद्ध कच्चा माल आधारित उद्योग है, इसलिये सूती वस्त्र उद्योग की स्थापना कच्चे माल या बाज़ार के समीप कहीं भी की जा सकती है।

■ प्रारंभ में इस उद्योग का विकास देश के कपास उत्पादक क्षेत्रों में ही हुआ। हाल के वर्षों में इस उद्योग का विकेंद्रीकरण बाज़ार की सुविधा वाले क्षेत्रों में हुआ है।

■ तमिलनाडु में देश की सर्वाधिक सूती कपड़ा मिलें हैं। यहाँ जलविद्युत, बाज़ार, कुशल और सस्ते श्रम व कच्चे माल की सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

■ अहमदाबाद देश का दूसरा सबसे बड़ा सूती वस्त्र उद्योग केंद्र है। इसे भारत का मैनचेस्टर कहा जाता है।

कागज़ उद्योग

■ कागज़ उद्योग में कच्चे माल के रूप में सेलुलोस की लुगदी का प्रयोग किया जाता है जिसकी प्राप्ति मुलायम लकड़ी, बाँस, घास, गन्ने की खोई तथा रद्दी कागज़ से होती है। भारत में कागज़ निर्माण के लिये सबसे अधिक बाँस का प्रयोग किया जाता है।

■ कागज़ उद्योग एक वज़नहासी उद्योग है। एक टन कागज़ बनाने के लिये ढाई टन कच्चे माल की आवश्यकता होती है अत: कागज़ उद्योग का विकास उन स्थानों पर हुआ जहाँ कच्चे माल की सुविधाएँ थीं।

जूट उद्योग

■ 'गोल्डन फाइबर' जूट एक प्राकृतिक नवीकरणीय और पारिस्थितिकीय अनुकूल उत्पाद होने के कारण सुरक्षित पैकेजिंग के सभी मानकों को पूरा करता है।

■ जूट उद्योग एक शुद्ध कच्चा माल आधारित उद्योग है, अतः इसके कारखाने बाज़ार या कच्चे माल के क्षेत्र में स्थापित किये जाते हैं। ■ देश में इस उद्योग का केंद्रीकरण जूट उत्पादक क्षेत्रों में ही देखने को मिलता है।

■ पश्चिम बंगाल देश में कुल जूट उत्पादन का लगभग 85% उत्पादित करता है। यहाँ जूट मिलें अधिक होने के निम्नलिखित कारण हैं-

● यहाँ जूट मिलों को आसानी से कच्चा माल प्राप्त होता है, क्योंकि पश्चिम बंगाल , व समीपवर्ती क्षेत्रों की जलवायु जूट उत्पादन के लिये उपयुक्त है।

● जनसंख्या की अधिकता के कारण सस्ती दर पर श्रमिक उपलब्ध हो जाते हैं। • बंदरगाह सुविधा होने के कारण निर्यात की सुविधा है।

चीनी उद्योग

■ चीनी उद्योग प्रधानतः कच्चे माल पर आधारित उद्योग है। यह एक भारहासी उद्योग है अतः इस उद्योग की अवस्थिति कच्चे माल के क्षेत्र में ही होती है।

■ चीनी के उत्पादन में ब्राज़ील विश्व में प्रथम स्थान रखता है।

              देश में गन्ने का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश है।

 ■ चीनी का उत्पादन मुख्यतः गन्ने से होता है किंतु वर्तमान में चुकंदर व शकरकंद से भी चीनी का उत्पादन हो रहा है।

         हाल की प्रवृत्ति में दक्षिण भारत के क्षेत्र में यह उद्योग तीव्र रूप से विकसित हो रहा है क्योंकि यहाँ गन्ने का प्रति हेक्टेयर उत्पादन उत्तर भारत की अपेक्षा अधिक है।


          दक्षिण भारत में चीनी उद्योग के तीव्र रूप से विकसित होने के अन्य कारण हैं-

            क) शक्कर बनाने की अवधि अपेक्षाकृत लंबी होना।

           ख) सहकारी क्षेत्रों के अंतर्गत मिलों की स्थापना।

           ग) गुड़ व खांडसारी उद्योग से कम प्रतिस्पर्द्धा ।

          घ)  चीनी के मौसम के बाद मिलों में मूंगफली का तेल निकालने की सुविधा ।


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